सनातन धर्म और वास्तु शास्त्र में सुबह के समय को बहुत ही ज्यादा कीमती माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि अगर दिन की शुरुआत अच्छी और पॉजिटिव एनर्जी के साथ हो, तो हमारा पूरा दिन ही खुशियों से भरा हुआ और सफल बना रहता है. दिन को इसी तरह की एक अच्छी और पॉजिटिव शुरुआत देने के लिए हमारे घर के बड़े-बुजुर्ग सुबह सबसे पहले अपनी हथेलियों को देखा करते हैं और परिवार के बाकी सभी सदस्यों को भी ऐसा ही करने की सलाह देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वे ऐसा क्यों करते हैं और हमें भी इसकी सलाह क्यों देते हैं? अगर आपके दिमाग में भी यही सवाल आ रहा है, तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ लें. आज हम आपको बहुत ही आसान शब्दों में समझाने वाले हैं कि इस पुरानी और सुंदर परंपरा के पीछे क्या धार्मिक, वास्तु से जुड़े और प्रैक्टिकल कारण छिपे हुए हैं. तो चलिए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से.
हमारी हथेलियों में होता है देवी-देवताओं का वास
शास्त्रों और वास्तु की अगर माने तो हमारे हाथों में ब्रह्मांड की सबसे बड़ी शक्तियां निवास करती हैं. इसके लिए हमारे सनातन धर्म में एक बहुत ही प्रसिद्ध श्लोक भी बताया गया है, जो ‘कराग्रे वसते लक्ष्मी’ से शुरू होता है. इस श्लोक का बिल्कुल सीधा और आसान अर्थ होता है कि हमारी उंगलियों के सबसे आगे वाले हिस्से में धन की देवी मां लक्ष्मी का वास होता है. हमारी हथेली के ठीक बीच वाले हिस्से में ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती रहती हैं. वहीं, हथेली के नीचे यानी कलाई के पास भगवान विष्णु का स्थान माना जाता है. इसलिए, जब हम सुबह जागते ही सबसे पहले अपने दोनों हाथों को देखते हैं, तो एक साथ हमें धन, बुद्धि और जीवन में सही रास्ते पर चलने का आशीर्वाद मिल जाता है.
निगेटिव एनर्जी से बचाव और वास्तु का फायदा
वास्तु शास्त्र के अनुसार जब हम रात को सोने के बाद अगली सुबह सोकर उठते हैं, तो हमारा शरीर और दिमाग पूरी तरह से शांत सिचुएशन में होते हैं. वास्तु शास्त्र की अगर माने तो सुबह आंख खुलते ही हमें किसी भी ऐसी चीज को नहीं देखना चाहिए जो मन में उदासी या निगेटिविटी को पैदा करे. उदाहरण के लिए, सुबह-सुबह बंद घड़ी, गंदा कमरा या आईना देखना बिल्कुल भी अच्छा नहीं माना जाता. कहा जाता है कि सुबह उठते ही आईना देखने से रात भर की निगेटिव एनर्जी हमारे अंदर दोबारा आ सकती है. इसके ठीक विपरीत, अपने खुद के हाथों को देखना सबसे शुद्ध और पवित्र माना गया है. इससे घर और जीवन का वास्तु दोष दूर होता है और मन में सुबह से ही अच्छे ख्याल आने लगते हैं.
सेल्फ-कॉन्फिडेंस और मेहनत की सबसे बड़ी सीख
इस ट्रेडिशन के पीछे एक बहुत डीप प्रैक्टिकल मैसेज भी छिपा हुआ है, जो हमें जीवन में आगे बढ़ने की सीख देता है. हमारी हथेलियां हमारी मेहनत यानी हमारे ‘कर्म’ की पहचान हैं. हम अपने जीवन में जो कुछ भी हासिल करते हैं या जो भी सफलता पाते हैं, वह अपने हाथों की मेहनत से ही पाते हैं. ऐसे में हर सुबह सोकर उठने के बाद अपने ही हाथों को देखने से हमें यह याद रहता है कि हमारे भाग्य को बनाने की ताकत भगवान ने हमारे अपने हाथों में ही दी है. यह छोटी सी आदत हमारे अंदर सेल्फ-रिलायंस और कॉन्फिडेंस की भावना जगाती है. इससे हम पूरे दिन ईमानदारी और लगन के साथ अपना काम करने के लिए मोटिवेटेड रहते हैं.
सुबह उठकर हथेलियों को देखने का सही तरीका
इस ट्रेडिशन का पूरा फायदा उठाने के लिए सुबह जैसे ही आपकी आंखें खुले, तुरंत उठकर बिस्तर से नीचे न उतरें. सोकर उठते ही सबसे पहले आराम से बिस्तर पर ही बैठ जाएं और अपने दोनों हाथों को मिलाकर एक खुली किताब की तरह अपने चेहरे के सामने लाएं. इसके बाद बिल्कुल शांत मन से अपने हाथों की रेखाओं और उंगलियों को देखें. अगर आपको श्लोक याद है तो मन में उसका जाप कर लें, और अगर याद नहीं है तो बस अपने भगवान का नाम ले लें. इसके बाद अपनी दोनों हथेलियों को आपस में थोड़ा रगड़ें ताकि उनमें हल्की सी गर्मी आ जाए. फिर इन गर्म हथेलियों को अपने पूरे चेहरे, आंखों और सिर पर धीरे से फेर लें. ऐसा करने से आपके शरीर में तुरंत एक नई एनर्जी और फ्रेशनेस आ जाएगी और आप पूरे दिन खुद को बेहतर महसूस करेंगे. यह एक बहुत ही आसान वास्तु का उपाय है, जो आपकी जिंदगी में सुख और शांति ला सकता है.
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